Home बिहार पहली बार पटना की हवा इतनी साफ, एक्यूआई रिकॉर्ड 40 से 46 के बीच

पहली बार पटना की हवा इतनी साफ, एक्यूआई रिकॉर्ड 40 से 46 के बीच

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पटना.। पिछले वर्ष दिसंबर और जनवरी में लगातार कई दिनाें तक देश में सबसे प्रदूषित रही पटना की हवा अभी एकदम साफ हाे गई है। मंगलवार की सुबह साढ़े आठ बजे राजधानी की एयर क्वालिटी इंडेक्स 40 से 46 थी। विशेषज्ञाें के मुताबिक यह आदर्श स्थिति में है। प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के चेयरमैन अशोक घोष ने बताया कि जब किसी शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स शून्य से 50 तक रहता है, तो यह सर्वाेत्तम माना जाता है। इसका अर्थ है कि शहर पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। हवा की ऐसी स्थिति आज की पीढ़ी ने पहली बार देखी है।

प्रदूषण रहित आबोहवा में लाेगाें की इम्यूनिटी पावर बढ़ता है। इसलिए इस हालत में काेराना से लड़ने में भी मदद मिलेगी। लेकिन, शाम साढ़े पांच बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स 41-72 तक पहुंच गई। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि सुबह में तो लोग लॉकडाउन का पालन ठीक ठाक कर रहे हैं, लेकिन शाम होते ही नियम-कानून की धज्जी उड़ाते सड़कों पर उतर आते हैं। इसका असर वायु की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। परिणाम यह है कि सुबह में पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त पटना शाम होते-होते थोड़ी प्रदूषित हो जा रही है।

जनवरी में 400 को पार कर गया था पटना का प्रदूषण स्तर 
जनवरी 2020 में पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से पार हो चुका था। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानक के अनुसार यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है। प्रदूषण अधिक होने की वजह से सड़क पर लोग निकलते थे तो आंख में जलन होने की शिकायत आने लगी थी, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन घोषित हुआ, तो करीब 36 दिनों में प्रदूषण गायब हो गया। 

अधिक प्रदूषण से लोगों की रोग से लड़ने की क्षमता पर भी असर
वरीय फिजिशियन डा राजीव रंजन का कहना है कि हवा में प्रदूषण नहीं रहने से आदमी का इम्युन पावर बढ़ता है। कोरोना जैसी बीमारी का इम्युनिटी से गहरा संबंध है। ऐसे में हवा में प्रदूषण का नहीं होना, शहरवासियों केलिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा रिसर्च में यह भी आया है कि कोरोना पॉल्यूशन पार्टिकल्स को माध्यम बनाता है। शुद्ध हवा रहने से यह माध्यम खत्म होता है और लोग काफी हद तक कोरोना से बचते हैं।  

पटना में प्रदूषण कम होने के प्रमुख कारण

  • पटना जिला के सभी ईट-भट्टा बंद, ग्रामीण क्षेत्रों में पुआल जलाना बंद
  • निर्माण सामग्री लाना ले जाना बंद और निर्माण करना बंद
  • करीब 90 फ़ीसदी वाहनों के परिचालन बंद
  • वाहन न चलने के कारण जहरीली गैस सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और धूल कण आरएसपीएम (रेस्पाइरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) व एसपीएम (सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) का उत्सर्जन नहीं।
  • फैक्टरियां, दुकान व मॉल बंद जेनरेटर से नहीं निकल रहा धुआं।

शाम में इंडेक्स ज्यादा क्याें

प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के चेयरमैन अशोक घोष बोले-सुबह में लोग लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करते हैं। वाहन का परिचालन कम होता है, जबकि दोपहर से शाम तक अच्छी खासी गाड़ियां सड़कों आती हैं। इससे इंडेक्स बढ़ता है।

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