Home बिहार जीविका की पहल योजना से 150 निर्धन महिलाएं बनीं व्यवसायी

जीविका की पहल योजना से 150 निर्धन महिलाएं बनीं व्यवसायी

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सरकार की गरीबी निवारण कार्यक्रम जीविका के माध्यम से एक अच्छी पहल सकरा में हुई है। जीविका ने सबसे गरीब 150 परिवारों का चयन कर प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है जिससे प्रखंड की महिलाएं प्रेरणा लें रहीं हैं।


सरकार की एक पहल कार्यक्रम से जुड़कर सकरा प्रखंड के भरथीपुर गांव की जन्मजात दोनों आंखों से दृष्टिहीन नीलम देवी समेत प्रखंड की 150 महिलाओं के परिवार की दशा और दिशा ही बदल गयी है। जीविका की सतत जीविकोपार्जन योजना से ग्राम संगठन के सबसे निर्धन सदस्यों के चयन कर इस योजना से लाभांवित कराया गया। इस योजना से लाभांवित होकर खुद व्यवसाय और रोजगार कर महिला परिवार व समाज में अब एक नयी पहचान बना रही हैं। इसमें फरोजपुर गांव की चानो देवी, जगदीशपुर बघनगरी पंचायत के सरैया गांव की कृष्णा देवी, भरथीपुर गांव की नीलम देवी, अनिता देवी आदि कई दर्जन महिला शामिल हैं जो इस योजना के माध्यम से परिवार में खुशहाली लाने में कामयाब रही हैं।


भरथीपुर गांव की दृष्टिहीन नीलम देवी कहती हैं दिव्यांग होने पर मंदबुद्धि युवक से शादी हुई जो मोची के काम के अलावा मजदूरी करते थे। लेकिन अचानक लंबी बीमारी से पीड़ित होने पर मजदूरी करने में असमर्थय हो गए। परिवार में भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गयी और दिव्यांग नीलम के उपर मानो पहाड़ टूट गया। इसके कंधे पर परिवार का बोझ आ गया और पति के इलाज का खर्च। गांवों में भीख मांगने लगी और घर में दो वक्त की रोटी किसी तरह जुटाते हुए बीमार पति दिलीप राम के इलाज का जुगार करने लगी। गांव की महिलाओं ने इसे जीविका का सदस्य बना दिया लेकिन सप्ताह में दस रूपये सदस्याता शुल्क को भी दिव्यांग नीलम नहीं जुटा पा रही थी। जीविका के सतत जीविकोपार्जन योजना में चयनित की गयी और जेनरल स्टोर्स की दूकान खोलने के लिए लोन इसे दिया गया।

पहले काफी घबराने लगी। गुमटी में गांव में ही दुकान खोलकर दुकान चलाने लगी। दिव्यांग होने के बाद भी वह आराम से ग्राहकों के मांगे समान को निकालकर देती है। जीविका के सहारे आज दिव्यांग नीलम देवी के परिवार में खुशहाली है। परिवार के रहन सहन, दशा और दिशा ही अब बदल गयी है। गांव के लोग पहले इसे भीखमंगी  कहकर बुलाते थे लेकिन आज वहीं जीविका दीदी के नाम से पुकारते हैं। दुकान चलाकर नीलम अपने बच्चों को पढ़ा रही है और बीमार पति का इलाज करा रही है।


             

सतत जीविकोपार्जन योजना में सकरा के 105 अत्यंत गरीब परिवारों का चयन किया गया। सभी को आवासीय प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। दृष्टिहीन नीलम देवी समेत कई महिलाएं दूसरों को लिए प्रेरणा हैं।
 मनोज कुमार, जीविका बीपीएम 

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