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स्वामी रामदेव से जाने साइनस के लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

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आयुर्वेद में ऐसी कई बीमारियां होती है जो दिखने में बड़ी साधारण होती है लेकिन कई बार ना सिर्फ वो शरीर को बड़ा कष्ट देती है वहीं आपको शर्मिंदा भी करती है और एक ऐसी ही बीमारी है साइनस की बीमारी।

दरअसल नाक, मस्तिष्क और आंखों के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद जगहों को ही साइनस कहते हैं और जब इन जगह में बाधा आने लग जाती है तो बलगम आसानी से नहीं निकाल पाता और ऐसे में व्यक्ति की नाक बार बार बंद होती है।

एक समय आने पर ये बीमारी गंभीर हो जाती है और कई बार तो ऑपरेशन भी करना पड़ता है। आज स्वामी रामदेव से हम इस बीमारी के कुछ घरेलु उपचार जानेगे। स्वामी जी कहते है, इस बीमारी को प्रतिश्याय कहा जाता है।

 प्रतिश्याय होने पर वात और कफ बढ़ जाता है जिसके कारण यह बीमारी होती है। स्वामी रामदेव कहते है की ऐसी समस्या होने पर अनुलोम विलोम और कपालभाति नियमित रूप से करना चाहिए। रोज़ आधा घंटा तो व्यायाम करना ही चाहिए।

इस बीमारी के उपचार के लिए दोनों हाथों की उंगलियों को दबाएं वहीं ताली बजाये। इसके अलावा 100 ग्राम बादाम, 20 ग्राम काली मिर्च और 50 ग्राम खांड का चूर्ण करके रोज़ एक चम्मच रात को दूध के साथ ले। इससे फायदा होगा वही कब्ज भी खत्म होगा।

साइनस की बीमारी में सौंठ और काली मिर्च को पीसकर थोड़ा सा शहद के साथ चाटे। इसके अलावा ठंडा पानी नहीं पीना है और तली भुनी चीज़े नहीं खानी है। घी का सेवन भी कम करें।

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